avibyakti

अपनी तथा आप सबों की अभिव्यक्ति का आकांक्षी

178 Posts

999 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3734 postid : 722008

घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध– Jagran Junction Forum

Posted On: 31 Mar, 2014 Junction Forum में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

. भाजपा की लहर अब भाजपा को ही ले डूबेगी, कुछ दिनों से ऐसा ही लग रहा है. बाहर से आये हुए लोगों को प्रतिष्ठित कर अपने आदरणीयों को अपमानित करना न्याय संगत नहीं है. “घर का जोगी जोगड़ा, आन गांव का सिद्ध” इस नियम पर चलने वाले बाद में पछताते हैं. तमाम कांग्रेसियों और विरोधी विचार वालों के सहयोग से प्रधान मंत्री का पद पा लेना, प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. लेकिन नरेंद्र मोदी का लहर बताने वाले लोग नरेंद्र मोदी को किसी भी कीमत में प्रधान मंत्री बनाना चाहते हैं. पार्टी रहे या न रहे. वरिष्ट नेता रहें या न रहे, लेकिन मोदी को प्रधान मंत्री बनाने की नीति पर अब भाजपा में ही विरोध हो रहा है. भाजपा के दिग्गज और पुराने नेता, पार्टी के उलूल-जुलूल हरकतों से परेशान है. लालकृष्ण अडवाणी, सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन, सरीखे नेतागण पार्टी के वर्त्तमान कार्य-कलापों पर अपना विरोध जाता चुके हैं. भाजपा को इस उचाई तक पहुँचाने वाले नेता आज अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. अटल विहारी वाजपेई की भतीजी करुणा शुक्ला ने कहा है कि वाजपेई जी पार्टी के कार्य-कलापों से नाखुश हैं. वाजपेयी जे के माध्यम से जाने जानी वाली करुणा शुक्ला, कांग्रेस में शामिल हो गई हैं. साबिर अली को भाजपा में शामिल किये जाने के मामले में पार्टी के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की. नकवी के विरोध के कारण साबिर अली को 24 घंटे के अंदर पार्टी से बाहर कर दिया गया. नकवी साहब ने नाराजगी में यहाँ तक कह दिया कि अब दाऊद इब्राहिम को भी शामिल किया जायेगा. भाजपा नेता पार्टी की वर्त्तमान नीतियों से नाराज हैं. बिहार में नाराज चल रहे लालमुनि चौबे को मानाने के लिए नरेंद्र मोदी को पहल करनी पड़ी.
. अब सवाल उठता है कि क्या भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र ख़त्म हो गया? भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से फैसला लेने लगे है? भाजपा के अंदर की कलह अब सड़क पर दिखने लगा है. जसवंत सिंह जैसे पुराने और दिग्गज नेता को निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में चुनाव में उतरना पड़ रहा है. वही राम कृपाल यादव, रामबिलास पासवान, एम जे अकबर, जगदम्बिका पाल जैसे भाजपा विरोधियों को पार्टी जयमाला पहनाकर स्वागत कर रही है. कल-तक जिनको पार्टी अपना दुश्मन समझ रही थी, आज अपना प्रत्यासी बना रही है. प्रत्यासी भी खाली जगह को भरने के लिए नहीं, वल्कि अपने पुराने वफादार साथियों को हटाकर. इस नीति का शिकायत पार्टी के अंदर भी हो रहा है और बाहर भी हो रहा है. आज भाजपा के प्रत्यासी के रूप में भाजपाई नहीं दिख रहे हैं. भाजपाइयों के जगह पर तमाम दूसरे दल के लोग नजर आ रहे हैं.
. पार्टी अगर व्यक्तिवादी हो रही है तो, भाजपा के लिए यह ठीक नहीं है. सिर्फ प्रधानमंत्री के पद को ही पाना अंतिम लक्ष्य है, तब भी पार्टी के लिए ठीक नहीं है. एनडीए से अलग होते समय में जदयू नेता शरद यादव ने कहा था, गठबंधन टूटने का कारण है, कि भाजपा के अब पुराने नेताओं की नहीं चल रही है. 17 पुराना गठबंधन की मुख्य भूमिका निभानेवाले नेता अब हासिये पर चले गए है. भाजपा की नई पीढी को आगे कर अगर पुराने लोगों को नजरअंदाज किया जाता तब भी अच्छा था, पर दूसरे दल के लोगों को आगे कर देने से भाजपा के अंदर उबाल है. पुराने नेताओं को पीछे ढकेलने का निर्णय आरएसएस का हो या राजनाथ सिंह या नरेंद्र मोदी का, पर पार्टी के लिए यह ठीक नहीं है. पार्टी की अंदरूनी कलह का नकारात्मक परिणाम लोकसभा चुनाव में दिख रहा है. कार्यकर्त्ता थोडा भी हतोत्साहित हुए तो परिणाम उलट जायेगा. मोदी जी का प्रधानमंत्री का पद सपने की बात हो जायेगी.



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

26 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhanuprakashsharma के द्वारा
April 27, 2014

परिवारवाद, वंशवाद, व्यक्तिवादी होती जा रही है राजनीति। इससे कोई दल अछूता नहीं है। कांग्रेस व स्थानीय दल परिवारवाद की परंपरा निभा रहे हैं, वहीं भाजपा में इन दिनों मोदी नाम का गुब्बारा उड़ रहा है। अपेक्षाएं काफी हैं। अब देखना है कि इसमें कब तक हवा रहती है। 

nishamittal के द्वारा
March 31, 2014

व्यक्तिगत महत्वाकाँक्षाएँ दलगत हितों या राष्ट्र हितों के ऊपर भारी पड़ना सदा घातक होता है


topic of the week



latest from jagran