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राजनीति का मकड़जाल- Jagran Junction Forum

Posted On: 29 Apr, 2014 Junction Forum में

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. बाबा रामदेव ने राहुल गांधी के खिलाफ ये कहकर कि राहुल गांधी दलितों के घर में हनीमून मानाने जाते हैं, राजनीति-जगत में भूचाल ला दिया है. बाबा रामदेव को इस तरह की ओछी बाते नहीं कहनी चाहिए ऐसा पूरा देश बोल रहा है. राहुल गांधी के लिए बोली गयी ये बात राहुल गांधी से ज्यादा देश के दलितों और देश के प्रबुद्ध लोगों के मर्माहत कर रही है. हालांकि मेरे जैसे देश के अन्य नागरिक इस बात को समझ रहे हैं कि बात का जो अर्थ हैं, वह कहने वाला का भाव नहीं है. तीर कमान से और बात जबान से छूट जाती है तो फिर लौट कर नहीं आती है. बाबा रामदेव ने अपने द्वारा बोले गए बातों के लिए खेद जताया हैं. उन्होंने माफी भी मांग ली है. मेरा भी मानना हैं की बाबा रामदेव के मुंह से निकली हुए बातों का जो भी अर्थ निकलता हो, पर बाबा इस विकृत सोंच के व्यक्ति नहीं हैं, और उन्हें मांफी मिल जानी चाहिए. बाबा रामदेव देश भक्त हैं, चाहे उनका रास्ता जो भी हो.
. काले धन के मुद्दे पर देश को गर्माने वाले बाबा रामदेव राजनीतिज्ञ कहीं से नहीं हैं. योग के ज्ञाता योगी जब राजनीति में आता है, तब इसी तरह से उलझ जाता है. राजनीति से बाहर के लोग राजनीति में जब आते हैं तब राजनीति के जाल में उलझ कर रह जाते हैं. राजनीति की जाल मकड़े के जाल से भी ज्यादा पेंचीदा है. योग से योगी तक बाबा रामदेव सानंद जीवन व्यतीत कर रहे थे, पर देश प्रेम में इन्होने राजनीति की शुरुआत करके आफत मोल ले ली. काले धन के मुद्दे पर जनता को आंदोलित करने वाले बाबा रामदेव अगर राजनीतिज्ञ रहते तब इस आंदोलन का बागडोर इनके हाथ से फिसल कर अन्ना हजारे के हाथ में नहीं जाता. दिल्ली रामलीला मैदान में बाबा के सलाहकारों ने समझा दिया की पुलिस वाले आपको जान से मार देंगे, और बाबा लड़कियों के कपड़ों में छुपने के प्रयास में पकडे गए. बाबा में तनिक भी राजनैतिक सूझ-बुझ होती तो ऐसा नहीं करते. वे लाल किले के मैदान में अपार जनसमूह के साथ मिडिया के सामने उस स्थिति का सामना करते और अधिक से अधिक गिरफ़्तार हो कर देश का नायक हो जाते. अदूरदर्शिता के कारण जनता को जगाने वाले बाबा जनता के आक्रोश को अपने पक्ष में नहीं ले सके. आक्रोशित जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हज़ारे के आंदोलन में शामिल हो गई और अन्ना को देश का हीरो बन गए. बाबा रामदेव को अपने आंदोलन के शुरुआत में सभी धर्मों का साथ मिला, पर अपनी अदूरदर्शिता के चलते बाबा अब सिर्फ भाजपा और हिंदुत्व के हो कर रह गए.
. बाबा रामदेव आज के दिन में सिर्फ कांग्रेस के विरोध के प्रतिक बन कर रह गए हैं. आंदोलन के क्रम में इनकी परेशानियों ने इन्हे नीतियों से दूर कर के कांग्रेस विरोधी बना दिया है. आज के दिन में बाबा के ऊपर कम से कम 80 से 90 मुकदमें होंगें. बाबा राम देव को फिर से अपने मुद्दों की समीक्षा करनी चाहिए. उन्हें भाजपा और कांग्रेस से समान दुरी रखते हुए अपने द्वारा गढ़े गए रास्ते पर चल कर काले-धन के मुद्दे पर जनता को गोलबंद करना चाहिए. अनावश्यक बयानबाजी से बचना इनके लिए नितांत आवश्यक है. बाबा रामदेव के बयान से भाजपा पर कुछ खास असर पड़नेवाला नहीं है. पर इस तरह की बातें बाबा को कमजोर करती है. जनता भी बाबा के कहे गए बातों का मतलब राहुल गांधी के विरोध के रूप में ले रही है, न की दलितों के अपमान के रूप में. पर बाबा को इस बात का ख्याल रखना होगा कि राजनीति के दलदल में फंसने के बाद निकला मुश्किल हो जाता है.



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
May 12, 2014

राजनीतिज्ञ रामदेव बाबा के बयां का जो मतलब निकले पर बाबा सचमुच राजनीती के मकड़ जाल में फंसते चले जा रहें हैं जो की बिलकुल अनावश्यक है उनके कांग्रेस वरोधी और कला धन विरोधी आंदोलन को चलने के लिए कांग्रेसी तो आज चारों तरफ से घिरे हैं और इस चुनाव में हार स्वीकार कर चुके हैं तभी मरता क्या न करता तीसरा मोर्चा फिर से बनने की कवायद शुरू हो गयी है .एक अच्छा आलेख

yamunapathak के द्वारा
April 30, 2014

राजेश जी वाणी का संयम साधू संत की सबसे बड़ी विशेषता होती है साभार

jlsingh के द्वारा
April 30, 2014

आदरणीय राजेश जी, सादर अभिवादन! ज्यादा बोलनेवाला कभी कभी galtee kar ही baithata है … गिरिराज सिंह और परवीन तोगड़िया के के मनोभाव वे नहीं रहे होंगे jo unhone kaha tha. कभी कभी अति स्वामिभक्ति दिखलाने के लिए या मीडिया में छाये rahane के लियए भी कुछ कुछ बोल देना पड़ता है डॉ. हर्षवर्धन के मुंह से भी waise ही निकल गया होगा … modi जी खुद यह मानते हैं की यह सब चुनावी बुखार के wakt bolagaya bayan है इसे गंभीरता से lene की आवश्यकता नहीं है…

parwati के द्वारा
April 29, 2014

काजल की कोठरी में काजल लग ही जाती है. रामदेव बाबा को संभल कर बोलना चाहिए.


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