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महंगाई का उपहार

Posted On: 25 Feb, 2015 social issues में

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. झारखण्ड में मुख्य-मंत्री रघुबर दास के द्वारा डीजल-पेट्रोल पर वैट बढ़ाने की घोषणा से जनता भौचक है. नई सरकार और महंगाई का उपहार जनता को पसंद नहीं है. चुनाव संपन्न हुए और रघुबर दास को मुख्यमंत्री बने कुछ ही समय बीते है. नरेंद्र मोदी के नाम पर हुए चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत में नहीं थी. आजसू से सहयोग के वावजूद सरकार निर्भय नहीं थी और मंत्री-मंडल का विस्तार रुका हुआ था, पर जेवीएम के टूट के बाद भाजपा में शामिल छ: विधायको के आ जाने से मंत्री मंडल का विस्तार हो गया और सरकार निर्भीक हो गयी. इस निर्भीकता की परिणति पहली कैबिनेट बैठक में डीजल-पेट्रोल का वैट बढ़ा कर हुआ. झारखण्ड में लगभग 46 % खनिज पदार्थ है. इस खनिज पदार्थ की प्रचुरता वाले राज्य में डीजल-पेट्रोल पर वैट न बढ़ा कर दूसरे खनिज पदार्थों पर शेष और रायल्टी बढ़ा कर राजस्व को पूरा किया जा सकता था. सरकार को लोक कल्याणकारी होना चाहिए, इस सिद्धांत के तहत लोक की जेब से पैसा लिए वगैर सरकार को अन्य उपायों से संसाधनों की वृद्धि करनी चाहिए थी.
. जब डीजल और पेट्रोल के दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ रहा था, तब किसी भी सरकार की नैतिकता नहीं जगी कि वैट या अन्य टैक्स को प्रतिशत में न कर के रूपये में कर दिया जाये. अंतराष्ट्रीय बाजार में जब दाम बढ़ते थे, तब टैक्स का भार भी जनता के सर पर डाल दिया जाता था. जनता अंतराष्ट्रीय बाजार के लिए जेब खाली करती थी, साथ ही साथ देश और राज्य सरकारों को टैक्स देने के लिए भी जेब खाली करनी पड़ती थी . जनता के प्रति केंद्र और राज्य की सरकारें गैर जवाब देह थी. अब अंतराष्ट्रीय बाजार में जब दाम कम हो रहे हैं, तब जनता को राहत मिलनी चाहिए थी लेकिन इस राहत के वजाय टैक्स की वृद्धि की जा रही है. तर्क की कसौटी पर टैक्स बढ़ाना कहीं से उचित प्रतीत नहीं हो रहा है. झारखण्ड तो एक उदाहरण मात्र है, अन्य राज्यों की भी कमोवेश यही स्थिति है.
. झारखण्ड में संपन्न हुए चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ कर बहुमत के करीब पहुंची है. भाजपा को वादा किये हुए बहुत दिन नहीं हुआ कि वह महंगाई कम करेगी और जन अपेक्षाओं के कसौटी पर खरा उतरेगी. मुख्य मंत्री रघुबर दास और उनके मंत्री मंडल ने अनावश्यक वैट बढ़ा कर जनता से नाइंसाफी किया है. डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी, इस बात को मंत्री मंडल के लोगों को समझनी चाहिए. झारखण्ड में डीजल पर वैट की वृद्धि से डीजल की बिक्री में कमी आएगी. अन्य राज्यों के वाहन जो झारखण्ड में डीजल खरीदते थे, दाम बढ़ने से वे अब झारखण्ड में डीजल नहीं खरीदेंगे, इस तरह मात्रा में कमी होने से बढ़ा हुआ वैट के वावजूद राजस्व में वृद्धि नहीं दिख रहा है.
. बढे हुए वैट का राज्य में वृद्धि होने के बाद विरोध भी होने लगा है. झारखण्ड पेट्रोलियम डीलर एसोसिएसन ने वैट का विरोध किया है. राज्य भर के पेट्रोल पम्पों पर कर्मियों ने 24 फरवरी को काला-बिल्ला लगा कर अपना विरोध दर्ज किया. पूर्व मुख्य-मंत्री हेमंत सोरेन ने भी इसे जन विरोधी बताया है. जनता के रोष को कम करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पहल करनी चाहिए. आखिर भाजपा झारखण्ड में बड़ी पार्टी रही तो इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है. मुख्य-मंत्री अगर जनता के मनोभाव को नहीं समझते है, तब भाजपा के बड़े नेताओं को पहल करना चाहिए और वैट को कम करना चाहिए. राज्य सरकार को जनता को ये भी बताना चाहिए की अभी डीजल-पेट्रोल से कितना राजस्व आ रहा है, और बढ़ने के बाद कितना राजस्व आएगा. पुन: कुछ दिनों के बाद सरकार बताये कि कितना राजस्व आया.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
March 3, 2015

सभी सरकारें जनता को ही उल्लू बनती हैं और उसी का दोहन भी करती है. अब तक लोगों को समझ में तो आही जाना चाहिए आदरणीय राजेश दुबे जी!

deepak pande के द्वारा
March 1, 2015

सुन्दर लेख आदरणीय राजेश जी परन्तु ये टैक्स से आया पैसा विकास में ही तो इस्तेमाल होगा विकास हेतु प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पैसा तो जनता से ही लिया जायेगा

February 25, 2015

सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं .सार्थक पोस्ट हेतु आभार


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