avibyakti

अपनी तथा आप सबों की अभिव्यक्ति का आकांक्षी

178 Posts

999 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3734 postid : 860132

राजनैतिक समझ की कमी

  • SocialTwist Tell-a-Friend

. आम आदमी पार्टी में पिछले कुछ दिनों से सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है. दो बड़े नेताओं को पार्टी के पीएसी (पॉलिटिकल अफेयर कमिटी) से बाहर कर देना वैकल्पिक राजनीती की धार को कुंद कर देना है. भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी पार्टी का उदय भारतीय राजनीती की एक जरुरत थी. कम समय में पार्टी को भारतीय राजनीती में उच्च स्थान प्राप्त करना इस बात का द्योतक हैं. चुनाव हारना या जीतना, बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात ये है कि भारतीय जनमानस में इस पार्टी ने एक नई आशा को जगाया है. आज, आम आदमी पार्टी बहस की मुद्दा हो गई है कि यह अच्छी है या बुरी. आम आदमी पार्टी मंजिल तक पहुंचेगी या नहीं ?
. योगेन्द्र यादव के बिना आम आदमी पार्टी कि कल्पना नहीं कि जा सकती है. पार्टी के गठन और नामकरण के पहले योगेन्द्र यादव का देश में दौरा को भुलाया नहीं जा सकता है. योगेन्द्र यादव ने उन तमाम पार्टियों से मिलकर जो अपने छोटे वजूद में ही सही अन्याय अत्याचार-भ्रष्टाचार के खिलाफ अँधेरे में दीपक कि तरह टिमटिमाते थे, नयी पार्टी के गठन के लिए तैयार किया था. योगेन्द्र यादव अगर आज ये कहने के लिए मजबूर है कि हमे पूरा भारत देखना है, हम भारतीय किसानों को यूँ ही नहीं छोड़ सकते है, इसके पीछे पार्टी बनाने के पहले के वादे ही है. राजनीती की ताकत और प्रेरणा जीन लोगों ने दिया है, उनकी चाह सिर्फ दिल्ली ही नहीं, वल्कि सम्पूर्ण देश है. आम आदमी पार्टी में कौन गलत और कौन सही है, इस मुद्दे से हट कर तय यह करना चाहिए कि जनता की अपेक्षाओं पर कैसे खरा उतरें.
. पिछले कुछ समय से देश में राजनैतिक समझ की कमी दिख रही है. कभी राजनैतिक कार्टून बनाने वालों पर मुकदमा होता है, तो कभी आलोचना करने वालों को पार्टी से निकाल बहार किया जाता है. यह कहानी किसी एक पार्टी की नहीं सभी पार्टियों की है. सहनशीलता का अभाव होने का मतलब राजनीती में तानाशाही है. जब भारत में लोकतंत्र की शुरुआत हुई थी, तब इस तरह की मानसिकता वाले नेता नहीं थे. अपने नेता की आलोचना करने की कुवत छोटे-छोटे कार्यकर्त्ता भी रखते थे. मतभेद होना कोई असहज बात नहीं है. मतभेद तो राजनीति में होता ही है, पर मतभेद को दुश्मनी में बदल देना लोकतंत्र और राजनीति में वर्जित है. अरविन्द केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के प्रतिक हैं. योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण भी अरविन्द केजरीवाल के ताकत है. आम जनता भी आप की ताकत है. इन ताकतों से दूर भागना या इन शक्तियों को नजर अंदाज करना उच्ची सोच नहीं है.
. लोहिया जी के ज़माने में कार्यकर्ताओं को तार्किक और राजनैतिक समझ के लिए शिविरों का आयोजन होता था. बहस करना और निर्भीक होना शिखाया जाता था. हम अपने लोकतांत्रिक इतिहास को देखते हैं तो पाते हैं कि कम पढ़े लिखे लोग भी देश कि समस्याओं और भावनाओं को ज्यादा समझते थे. विपक्ष का होना राजनीति में जरुरी है. कमजोर विपक्ष के अभाव में राज-सत्ता मनमानी करती है. आज आम आदमी पार्टी के नेताओं को चाहिए कि मतभेद को दुश्मनी में न बदलें. जनता ताकत देती है तो ताकत वापस ले भी लेती है. अरविन्द और योगेन्द्र जैसे बहुत सारे लोगों को जनता पैदा करती है, और ख़त्म भी कर देती है. इस लिए जनता की ताकत का सदुपयोग कर आम आदमी पार्टी को जनहित में आपसी कलह को समाप्त कर देनी चाहिए.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaundalynn के द्वारा
October 17, 2016

AFAICT you’ve coeevrd all the bases with this answer!

ashokkumardubey के द्वारा
March 19, 2015

आम आदमी पार्टी आतंरिक कलह में उलझकर देश को बैकल्पिक राजनीती देने में विफल हो जाएगी अतः आज जरुरी है “आप ” अपनी अप्र्यत्यासित जीत को पूरे देश में राजनीती में बदलाव के लिए काम में लाये साथ ही दिल्ली की जनता से किये गए वायदों को सिलसिलेवार ढंग से प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास करे और अपने काम और ईमानदारी के बदौलत पूरे देश में पार्टी संगठन को मजबूत बनाये तभी जाकर देश की जनता को फिर से नेताओं के प्रति विश्वास जागेगा और नेताओं की छवि सही मायनों में नेतृत्व करने वाली दिखेगी

Shobha के द्वारा
March 13, 2015

श्री दूबे जी मैने पहले भी इस लेख पर अपने विचार दिए थे अब संक्षेप में बहुत अच्छा लेख शोभा


topic of the week



latest from jagran