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मसरत को गिरफ़्तार करो

Posted On: 16 Apr, 2015 social issues में

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. अपने देश भारत के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में जो घटनाएँ घट रही है, इससे अंतरराष्ट्रिय स्तर पर भारत को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है. कल 15 अप्रैल को कश्मीर घाटी में देश को शर्मसार करते हुए पाकिस्तानी झंडा फहराने और पाकिस्तान के समर्थन में नारा लगाने की घटना से सारा देश उग्र है. हमारे देश के गलियों में गूंजने वाला देश प्रेम के गीत, कि “सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं” का अपमान है. देश की आजादी में लगे सेना के जवानों का हौसला गिराने वाली घटना है. ताज्जुब की बात है कि अभी तक मसरत आलम गिरफ़्तार कैसे नहीं हुआ. अपने ही देश में देश विरोधी नारे लग रहे हैं, पाकिस्तानी झंडे फहराये जा रहे हैं और हम वर्दास्त कर रहे हैं आखिर क्यों? किसकी सह पर इनकी हिम्मत बढ़ी हुयी है, यह चिंतनीय हैं.
. मसरत आलम को अक्टूबर 2010 में देश द्रोह और भड़काऊं भाषण के लिए गिरफ़्तार किया गया था. उस समय इसके ऊपर 10 लाख का इनाम था और इसको गिरफ़्तार करने में पुलिस को चार महीने लग गए थे. उस समय भी मसरत ने कहा था कि तुम थक जाओगे पर मैं नहीं थकूंगा. पीडीपी के नेता मुफ्ती सईद जो वर्तमान में भाजपा के सहयोग से वहाँ के मुख्यमंत्री हैं, हमेशा अलगाव वादियों के समर्थन में रहते हैं, ऐसा व्यवहार में देखने को मिलता है. 1989 की घटना भी देशवाशियों को याद हैं, उस समय मुफ़्ती सईद देश के गृह मंत्री थे. उस समय उनकी बेटी रुबिया सईद का अपहरण हो गया था. बहुत से लोग इस अपहरण को नाटक बताने से भी नहीं हिचकते है. उस समय रुबिया के अपहरण-कर्ता आतंकवादियों ने रुबिया की रिहाई के बदले अपने 5 आतंकी साथियों को छोड़ने की मांग की थी, और ताज्जुब की बात की 5 आतंकियों को रुबिया के नाम पर छोड़ा गया था. हम यूँ कह सकते हैं कि कश्मीर में इसके बाद अलगाववादियों का हौसला बुलंद हो गया. रुबिया के अपहरण कर्ता मुस्ताक जरगर को भी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था, पर उसे भी 1999 में सरकार ने दबाव में आ कर छोड़ दिया. 1999 में भारतीय हवाई जहाज इंडियन एयरलाइन्स ई सी 814 का अपहरण इन्ही आतंकियों द्वारा कर लिया गया और धमकी दी गई की हमारे साथियों को छोडो नहीं तो यात्री जहाज को यात्री सहित उड़ा देंगे. उस जहाज में लगभग 178 यात्री मौजूद थे. आतंकियों ने दबाव बना कर अपने आतंकी साथियों को छोड़ने की मांग की, और आतंकियों को छोड़ा भी गया. भाजपा को अपने सहयोगी मुफ़्ती सईद को दो टूक बता देना चाहिए की देश की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले लोगों से हमदर्दी नहीं करे. अभी भी मुफ़्ती सईद इस व्यान की तीखी आलोचना के बदले कह रहे हैं कि कानून के अनुरूप करवाई की जाएगी.
. इस घटना से आज देश का एक-एक नौजवान आक्रोशित है. गृह मंत्री जी सिर्फ वाणी से नहीं अपने कानून सम्मत शक्तियों से इस तरह के अलगाववादी लोगों से निपटे पीडीपी के नेता और प्रवक्ता अभी भी लीपा -पोती में लगे हुए हैं. गृह मंत्री और प्रधान मंत्री को उस दिन ही सचेत हो जाना चाहिए था जब मुख्य-मंत्री का सपथ लेने के बाद मुफ़्ती सईद ने शांति पूर्ण चुनाव का श्रेय पाकिस्तान को और अशांति फैलाने वाला हुर्रियत के नेताओं को दिया था. हमारे देश के नौजवान भारतीय फौज और सुरक्षा बलों में भर्ती हो कर देश के नाम पर मर मिटने के लिए तैयार हैं, उन नौजवानो का हौसला अफजाई के बदले पाकिस्तानियों और अलगाव-वादियों सम्मान देने वाले व्यक्तियों और पार्टियों से उम्मीद न करते हुए सावधान रहने की जरुरत है.
. गृह मंत्री को गिरफ़्तारी का लम्बा इंतजार नहीं करना चाहिए. देश-हित में पीडीपी की सरकार पर भी सख्ती की जरुरत है. देश से बड़ा किसी का भी कद नहीं हो सकता है. 1989 और 1999 की हरकतों को दुहराने की जरुरत नहीं है. भारत में रहने वालों को भारत से प्रेम रखना होगा. तिरंगा ध्वज का सम्मान करना होगा.

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MASOOM के द्वारा
April 17, 2015

भारत देश में रहकर भारत विरोधी कार्यों को अंजाम देना अक्षम्य हैं. ऐसे आस्तीन के साँपों से किसी तरह की नरमी नहीं बरतनी चाहिए.


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