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बिहार में शराबबंदी, सकारात्मक पहल

Posted On 6 Apr, 2016 Social Issues में

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. बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार और उनके मंत्री-मंडल को शाबासी मिलनी चाहिए. विरोधियों को विरोध में बोलने का हक है, पर इस बार विरोधियों को अपना विरोध में बोलने का हक को छोड़ कर शराब बंदी के लिए नीतीश कुमार का पीठ थपथपाना चाहिए. अच्छे काम के लिए वधाई देनी चाहिए. अब तो पूर्ण शराब बंदी की घोषणा कर दी गई है. बिहार के इस साहसिक काम से दुशरे राज्यों को भी सीखना चाहिए, जहां शराब बंदी नहीं है.
. बहुत से लोगों का कहना है कि नशा के अभ्यस्त लोगों को एक ब एक शराब बंद होने से कठिनाई हो रही है. बहुत से लोग साबुन खाने लगे हैं. अस्पतालों में नशा के मरीजों की भीड़ बढ़ी है. नशा बंदी के खिलाफ तर्क गढ़े जा रहे है. पर नशा के पक्ष में कुछ नहीं कहा जा सकता है. नशा सामाजिक बुराई है, नशा समाज को पतित और भ्रष्ट करता है. नशा कोई करें झेलना आधी आबादी यानि औरतों को पड़ता है. बिहार के गांव-गांव में जो शराब की स्थिति थी उसे देख कर लगता था कि बिहार किस चौराहे पर खड़ा है. वैध से ज्यादा अवैध दुकानों की भरमार थी. गांव-गांव में कुटीर उद्योग की तरह शराब का कारोबार फल-फूल रहा था. मजदुर वर्ग अपनी गाढ़ी कमाई का आधे से ज्यादा हिस्सा नशा के मदहोशी में खर्च करता था. सुबह नींद खुलने के बाद से नशा का कारोबार पीने और पिलाने का शुरू हो जाता था, ऐसे में पूर्ण शराब बंदी की घोषणा आनंद दायक है. सत्ता और सत्ता के सहयोगी तंत्र इसे ईमानदारी से लागु करें, यह बिहार के सम्मान और उत्थान के लिए उचित और जरुरी है. विपक्ष भी खुश है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इस काम को बहुत पहले कर देना चाहिए था. विपक्षी शराब बंदी का श्रेय अपने ऊपर ले रहे है. चाहे जैसे भी शराब बंदी हुई हो, परिणाम अच्छा है.
. जिन लोगों को शराब की काली कमाई का चस्का लगा है, अब उन्हें सँभालने की जरूरत पड़ेगी. जरुरत के हिसाब से सख्ती भी करनी पड़ेगी. लेकिन एक अप्रैल के पहले जिस तरह से शराब बंदी की तैयारी में शासन-प्रशासन जुटा था उस हिसाब से लग रहा है कि सरकार पुरे मन से शराब बंदी के लिए कमर कस कर तैयार है. सभी थाना प्रभारियों से लिखित माँगा गया है कि इस बात का प्रमाण दे की उनके थाना में शराब पूरी तरह से बंद है. बाद में शराब की खरीद-बिक्री पाए जाने पर सम्वन्धित थाना प्रभारी पर करवाई होगी. काम कठिन है, जोखिम से भरा हुआ है, पर मुश्किल नहीं है. प्रशासन के सहयोग में बिहार की जनता है. औरतें पूरी तरह से है. बच्चे, औरतों के साथ हैं. सत्ता पक्ष और विपक्ष भी है.
. शराब बंद नहीं सकता कुछ लोगों को आशंका है. बंद होने से क्या-क्या घाटा हो सकता है, इसके भी तर्क दिए जा रहे हैं. ऋषि कपूर जैसे प्रसिद्ध कलाकार का कहना है कि शराब बंद होने के कारण लोग अस्प्ताल पहुँच रहे है. ऋषि कपूर तो शराब बंदी की नीति को ही कटघरे में खड़ा करते हैं. उनके अनुसार तीन हजार करोड़ राजस्व की हानि है और शराब बंदी कभी कामयाब नहीं हुई है. शराब बंदी के बाद अवैध रूप से शराब बिकने लगता है. विशाल जन समूह शराब बंदी से खुश है तो कुछ लोग को बुरा भी लग रहा है, पर जो भी हो यह फैसला बिहार के हित में है. घाव बड़ा होने पर आपरेशन की जरूरत पड़ती है, कुछ दिन के लिए घाव से भी ज्यादा दर्द आपरेशन देता है, पर आपरेशन के बाद घाव ठीक हो जाता है. बिहार का यह घाव भी आपरेशन के समय ज्यादा दर्द कर रहा है, पर इससे घाव ठीक होगा.
. सरकार के तरफ से जागरूकता अभियान चलाया गया है, मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है. जनता को जोड़ा गया है और सहयोग की अपील की गई है. शराब बंदी की तैयारी पूरी कर ली गई है. गुजरात, नागालैंड और मिजोरम के बाद बिहार चौथा राज्य है, जहाँ शराब जैसी सामाजिक बुराई को ख़त्म करने के लिए सरकारी स्तर पर फैसला लिया गया. नशा का अब नंगा नाँच सुदूर गांव देहात में देखने को नहीं मिलेगा.
. शराब को दुनियां के महापुरुषों ने भी कभी सराहा नहीं. संत कबीर दास जी के शब्दों में- “औगुन कहूं शराब का, ज्ञानवंत सुनी लेय. मानुष सों पसुवा करै, द्रव्य गांठि का देय”. राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी का कथन है-“यदि देश में शराब बंदी लागु नही होगी तो हमारी स्वतंत्रता गुलामी बनकर रह जायेगी”.



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Regina के द्वारा
October 17, 2016

Hey, good to find somonee who agrees with me. GMTA.

Shobha के द्वारा
April 11, 2016

श्री दूबेजी भीत अच्छा विश्लेष्ण करता हुआ लेख शराब से राजस्व की हानि जरुर होती है परन्तु शराब के नुक्सान अधिक हैं कबीर दास जी के शब्दों में- “औगुन कहूं शराब का, ज्ञानवंत सुनी लेय. मानुष सों पसुवा करै, द्रव्य गांठि का देय”. राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी का कथन है-“यदि देश में शराब बंदी लागु नही होगी तो हमारी स्वतंत्रता गुलामी बनकर रह जायेगी”.महापुरुषों के विचारों को लेकर आपने शराब की निंदा की है अच्छे विचार

Ravi Kumar के द्वारा
April 7, 2016

बिहार में यह अच्छा काम हुआ है. अब अपराध भी कम होगा. अपराध का कारक शराब भी है.


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