avibyakti

अपनी तथा आप सबों की अभिव्यक्ति का आकांक्षी

178 Posts

999 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3734 postid : 1192919

राजनीती के शिकार हुए "राजन"

Posted On: 19 Jun, 2016 Politics में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

. रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के साथ सब कुछ ठीक-ठाक नहीं हो रहा है. रिजर्व बैंक के गवर्नर के क्रिया-कलापों की समीक्षा करना और क्या सही कर रहे हैं और क्या गलत यह मेरे समझदारी के बुते के बाहर है. मेरे जैसे समझ रखने वाले भारतीय जन मानस अरबों में हैं. रघुराम राजन की जिम्मेवारी किसी भी राजनेता की जिम्मेवारी की तरह नहीं है. राजनेता जब चाहते हैं और जो चाहते है, बक-बक कर देते है, पर रिजर्व बैंक का गवर्नर ऐसा नहीं कर सकता. उसके बोलने का मतलब होता है. वह जो भी करता है उसका दूरगामी प्रभाव देश पर पड़ता है. राजन के पीछे कुछ राजनीतिज्ञ कमर कश के पड़े थे, और पता नहीं किस दुर्भावना से उनको बहुत पहले हटाना चाहते थे. राजन का कार्य-काल सितंबर में पूरा हो रहा है, और रिटायर होने के बाद अपने जीवन के अगले योजना को भी उन्होंने सोच लिया है. यह उनकी बुद्धिमानी ही है कि वे मोह से ग्रसित नहीं हैं, और अपने कार्य विस्तार का मोह भी नहीं पाले हुए है. वे भारतीय राजनीती की ताकत को जानते हैं कि देश का चाहे जितना अनर्थ हो जाय, पर जिद्दी राजनीतिज्ञ अपने मन का करेगा.
. देश के राजनीतिज्ञों की आदत रही है किसी भी काम में अड़ंगा डालने का. नासमझ होते हुए भी वे नहीं मानते की उन्हें इस विषय में ज्ञान नहीं है. रघुराम राजन ने घोषणा कर दिया है कि वे दूसरा कार्य-काल नहीं लेंगे. उनकी यह घोषणा भारत के लिए अच्छी हो या बुरी, पर उनके बड़े विरोधी सुब्रहण्यम स्वामी ने अपनी टिप्पणी दे डाली है कि उन्हें, पता था कि उनका कार्यकाल नहीं बढ़ेगा. सुब्रह्मण्यम स्वामी जी अच्छे राजनीतिज्ञ विचारकों में से एक है, और उनके इस तरह की कमर कस लड़ाई देश वासियों को निश्चित हीं पसंद नहीं आया. रघुराम राजन पर स्वामी जी आरोप लगाते रहते हैं कि उन्हें भारतीय अर्थ व्यवस्था से मोह नहीं हैं, और वे अर्थ व्यवस्था को कमजोर करने में लगे हुए हैं. स्वामी जी का कहना है कि हमारी अर्थ व्यवस्था में राजन ने 2013 से टाइम बम लगा दिया है जो दिसंबर 2016 में फटेगा. स्वामी जी ने कई बार प्रधानमंत्री जी को पत्र लिख कर उनके खिलाफ तरह-तरह के आरोप लगाए थे.
रघुराम राजन ने जब अपना फैसला सुना दिया की अब वे सेवा विस्तार नहीं लेंगे, तब देश के अर्थ शास्त्रियों की प्रतिक्रिया भी आने लगी है. प्रशिद्ध अर्थ शास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने दुःख प्रकट किया है और कहा है की भारत एक दक्ष आर्थिक विचरक खो रहा है. अमर्त्य सेन ने उनके ऊपर कटाक्ष करने वालों पर भी नाराजगी जाहिर की है. इम्फोसिस के सीईओ विशाल सिक्का के नजरों में भी राजन का काम सराहनीय है.. पी. चिदंबरम और राहुल गांधी ने भी राजन के काम को अच्छा बताया है.
. ख़बरें पहले से आ रही थी, और पढ़ कर यहीं लग रहा था कि राजन साहब राजनीती के शिकार हो रहे हैं. उन्हें कांग्रेस का एजेंट कह कर बेइज्जत किया जा रहा था. हमारे देश की लोकतान्त्रिक प्रक्रिया इस तरह की है, कि एक सरकार के नियुक्त किये हुए व्यक्ति दूसरी सरकार के कार्यकाल में चले आते है. सरकार चाहे जिस पार्टी की हो, जनता की होती है. देश हित के लिए होती है. संस्थाएं और उसके प्रमुख देश हित में काम करते हैं. इस लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में किसी को एजेंट और दलाल कह कर अपमानित करना निंदनीय है. भारतीय संस्था रिजर्व बैंक के प्रमुख राजन कही न कही ओछी राजनीती के शिकार हुए है. भारत मजबूती से विश्व बिरादरी में ऊँचा उठने कि जदोजहद में हैं और हम इसे किसी न किसी रूप में कमजोर किये जा रहे हैं, यह ठीक नहीं है. सभी को दायरे में रह कर देश हित की बाते सोचनी चाहिए.



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chuckles के द्वारा
October 17, 2016

Woot, I will cernlitay put this to good use!

Shobha के द्वारा
June 20, 2016

श्री दूबे जी समीक्षात्मक लेख अच्छा लेख

jlsingh के द्वारा
June 19, 2016

आदरणीय राजेश दुबे जी, जैसा राजा वैसी प्रजा! अब तक जो हुआ है वह ठीक ही हुआ है, ऐज जो भी होगा ठीक ही होगा, यही न है गीता ज्ञान! ात: अब योग करिये और मन को चिंतामुक्त रखिये और क्या कहें!


topic of the week



latest from jagran